एक अबोध बालक को क्या पता कि काले विषैले नाग कितना खतरनाक होतें हैं। वह तो खिलौना समझकर हर वस्तु से खेलने लगते हैं। भावेश भी उस उस विषैले सर्प से इस प्रकार खेल रहा था कि जैसे वह किसी खिलौने से खेल रहा हो। लेकिन विस्मयकारी बात यह थी कि वह विषैला नाग भी भावेश को काटने के बजाय उससे बचने के लिए अपने फन को इधर-उधर घुमा ले रहा था। ऐसा लग रहा था कि, वह विषैला नाग भी जैसे उससे खेल रहा था। लेकिन इन जंगली कीड़ों का क्या भरोसा? कि कब वह डस लें । इसके पूर्व ऐसा दृश्य तो उसने अपने जीवन में कभी न सुना है न देखा है।
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